📢 यह एक झूठे दस्तावेज़ी षड्यंत्र का पर्दाफाश है
🔍 क्या हुआ है?
- एक पंजीकृत MSME निर्यातक जिसने 23 वर्षों से अमेरिका व यूरोप को निर्यात कर भारतीय शिल्पकला और गौसेवा से विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया, ICICI बैंक और उसके सहयोगी साजिशकर्ताओं द्वारा झूठे ऋण समझौतों, जाली मॉर्गेज दस्तावेज़ों और मनगढ़ंत OTS प्रस्ताव के माध्यम से अपनी संपत्ति और व्यवसाय से वंचित कर दिया गया।
- ₹32 करोड़ से अधिक के विदेशी निर्यात आदेश सिर्फ इसलिए रद्द हो गए क्योंकि MSME को सुनवाई के बिना डीआरटी (DRT Jaipur) ने फर्जी तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया।
🚨 कैसे हुआ अन्याय?
- जाली सह-उधारकर्ताओं को शामिल कर के एक फर्जी SA-339/2021 दाखिल की गई, जिसमें मुख्य MSME उधारकर्ता की सहमति तक नहीं थी।
- MSME उधारकर्ता की 82 वर्षीय माँ को भावनात्मक और मानसिक दबाव देकर उनकी संपत्ति छीनने के लिए इस्तेमाल किया गया।
- ₹75 लाख रुपये बैंक खाते से अवैध रूप से UUCB बैंक में स्थानांतरित किए गए, बिना उधारकर्ता की जानकारी या सहमति के।
- DRT ने असली याचिका SA-351/2024 को पूरी तरह अनदेखा कर दिया, जबकि उसमें मूल दस्तावेज़, खरीददार संचार, RBI दिशानिर्देश और MSME की क्षति के सबूत सम्मिलित थे।
🧾 उच्च न्यायालय ने क्या कहा?
- राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिका को सिर्फ इस आधार पर समाप्त किया कि DRT अब क्रियाशील है। कहीं भी कोई पूर्व-भुगतान या अंडरटेकिंग का निर्देश नहीं था, फिर भी DRT ने गलत व्याख्या कर के केस खारिज कर दिया।
📣 हम क्यों बोल रहे हैं?
- यह न केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध बल्कि पूरे MSME, गौसेवा, जनजातीय मजदूरों, और भारत के विदेशी व्यापार सम्मान के विरुद्ध हमला है।
- अमेरिका और यूरोप के विदेशी खरीदारों ने आदेश रद्द किए, विश्वास खोया और वित्तीय क्षति उठाई।
- यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार निगरानी, मानवाधिकार मंचों और विदेशी अदालतों की जांच में है।
📢 जनता से अपील:
यह केवल न्यायालय का मामला नहीं है — यह आपकी आवाज़ दबाने की एक योजना है।
आइए, इस अन्याय के विरुद्ध खड़े हों और इन फर्जी दस्तावेज़ों, झूठे सह-उधारकर्ताओं और भ्रष्ट वकीलों, बैंक अधिकारियों, और सीए की साजिशों का पर्दाफाश करें।
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✅ न्याय के पक्ष में आवाज़ उठाएं,
✅ MSME और गौसेवा जैसे राष्ट्रीय मूल्यों की रक्षा करें।